एकलव्य की गुरु-भक्ति
लगन और गुरु निष्ठा की कथा।
एकलव्य नाम का एक बालक धनुर्विद्या सीखना चाहता था, पर गुरु द्रोणाचार्य ने उसे शिष्य नहीं बनाया। निराश होकर उसने मिट्टी की गुरु-प्रतिमा बनाई और उसी के सामने अभ्यास करता रहा।
उसकी लगन इतनी गहरी थी कि वह अद्भुत धनुर्धर बन गया। सीख: सच्ची लगन और निष्ठा गुरु के औपचारिक आशीर्वाद से भी आगे ले जाती है।
