मार्कंडेय और शिव
भक्ति से काल पर विजय की कथा।
ऋषि मार्कंडेय की आयु बहुत कम लिखी थी। उनके माता-पिता चिंतित थे, पर बालक शिवभक्ति में लीन रहा। जब यमराज उसके प्राण लेने आए, तो वह शिवलिंग से लिपट गया।
भगवान शिव प्रकट हुए और यमराज को पीछे हटना पड़ा। मार्कंडेय को दीर्घायु का वरदान मिला। सीख: सच्ची भक्ति काल से भी बड़ी शक्ति है।
