कबीर और मन का दीपक
बाहर नहीं, भीतर खोजने की सीख।
एक व्यक्ति कबीर के पास आया और बोला कि वह ईश्वर को ढूँढते-ढूँढते थक गया है। कबीर ने दीपक जलाया और पूछा कि इसकी रोशनी कहाँ है। व्यक्ति ने कहा कि दीपक के भीतर।
कबीर ने कहा कि जैसे दीपक की रोशनी भीतर से आती है, वैसे ही ईश्वर हमारे मन के भीतर है। बाहर भटकने के बजाय मन को शुद्ध करो। सीख: सच्ची खोज भीतर से शुरू होती है।
