राजा जनक की विदेह दृष्टि
कर्म करते हुए भी निर्लिप्त रहने की कहानी।
राजा जनक राजकाज में व्यस्त रहते थे, पर उनका मन शांत रहता था। एक ऋषि ने उनसे पूछा कि आप इतने धन और जिम्मेदारी के बीच कैसे शांत हैं।
जनक ने एक कटोरे में तेल भरकर उसे सिर पर रखकर नगर का चक्कर लगाने को कहा, और शर्त रखी कि एक बूँद न गिरे। ऋषि ने पूरी सावधानी से चक्कर लगाया। जनक बोले कि जैसे तुम्हारा ध्यान उस कटोरे पर था, वैसे ही मैं अपने कर्म में ध्यान रखता हूँ, पर मन उससे बंधता नहीं। सीख: कर्म करो, पर आसक्ति से मुक्त रहो।
