मन ही मंदिर है
भीतर के ईश्वर को पहचानने की कहानी।
एक राजा ने एक विशाल मंदिर बनवाया, जिसमें सोने की मूर्ति थी। वह रोज़ धन चढ़ाता, फिर भी मन अशांत रहता। एक दिन एक साधु आया और मंदिर के बाहर एक गरीब को भोजन कराते देखा।
साधु ने कहा कि ईश्वर मूर्ति में कम और दीन-दुखियों के हृदय में अधिक बसते हैं। राजा ने अपने मन को मंदिर बनाया और सेवा को पूजा। सीख: मन की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।
