सेवा ही पूजा
निःस्वार्थ सेवा की महिमा।
एक गाँव में एक महिला रोज़ मंदिर में फूल चढ़ाती थी, पर घर के बीमार पड़ोसी की सुध नहीं लेती थी। एक दिन मंदिर के पुजारी ने उससे कहा कि भगवान वहाँ नहीं, उस बीमार के पास मिलेंगे।
महिला ने पड़ोसी की सेवा शुरू की। उसके मन को जो शांति मिली, वह मंदिर में भी नहीं मिली थी। सीख: जहाँ सेवा है, वहीं ईश्वर का वास है।
