ध्रुव की तपस्या
बालक ध्रुव की दृढ़ निष्ठा की कथा।
राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को सौतेली माँ ने पिता की गोद से हटा दिया। पाँच वर्ष के बालक ध्रुव ने ठान लिया कि वह ऐसा स्थान पाएगा जो सबसे ऊँचा हो।
उसने वन में कठोर तपस्या की। भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और ध्रुव को अटल पद दिया, जो आज भी ध्रुव तारे के रूप में आकाश में चमकता है। सीख: दृढ़ संकल्प और धैर्य से असंभव भी संभव होता है।
